प्रकार से माइग्रेनअटैक करता कई


 प्रकार से माइग्रेनअटैक करता  कई


सोनी को अक्सर सुबह उठते ही सिरदर्द होने लगता था, सिरदर्द की उत्तेजना इतनी अधिक होती थी कि उसे किसी तरह से आराम नहीं मिलता था, कभी-कभी तो वह अपना सिर दीवार में मारने लगता था। तो, हारकर उसने डाक्टर को दिखाया तब पता चला कि वह सिरदर्द की ऐसी समस्या से ग्रस्त है जो कि जीवन भर उसका साथ नहीं छोड़ेगी, असल में, वह माइग्रेन की चपेट में आ चुकी थी। दर्द हमारे जीवन का एक अभिन्न भाग है। हर कोई कभी न कभी, कहीं न कहीं तो किसी न किसी प्रकार के दर्द से अवश्य ही जूझता है। कमर दर्द, दांत दर्द, पैर दर्द, गर्दन दर्द तो  ऐसे आम दर्द हैं जिनकी शिकायत रोजाना सुनने को मिल सकती है। ऐसा ही एक आम तौर पर उभरने वाला दर्द है- सिरदर्द। हम अक्सर ही सिरदर्द से परेशान हो जाते हैं। वैसे तो सिरदर्द को सामान्य ही समझा जाता है, लेकिन हर केस में अक्सर होने वाला सिरदर्द आम नहीं होता है। वास्तव में, बहुत सी बड़ी बीमारियों के आगाज का अंदाज सिरदर्द से ही होता है। ऐसी ही एक गम्भीर बीमारी है माइग्रेन, जिसे आम बोलचाल की भाषा में अधकपाड़ी भी कहा जाता है, क्योंकि इसका भयानक दर्द सिर के एक ही भाग में होता है। नयी दिल्ली स्थित सरगंगाराम हास्पिटल के न्यूरो स्पाइन सर्जन डा. सतनाम सिंह छाबड़ा के अनुसार माइग्रेन साधारणतः सिर व गर्दन में हल्के दर्द के साथ शुरू होता है और बढ़ते-बढ़ते सिर के एक हिस्से में पहुंच जाता है। यह सामान्यतः कुछ घंटों में दूर हो जाता है और इसके लक्षणों में जी मचलना, उल्टी होना, रोशनी को देखखर घबराहट होना, शोर या किसी भी प्रकार की खुशबू से चिढ़न होना, गर्दन या कंधे में दर्द या उन्हें मोड़ने में दर्द होना, दृष्टि संबंध समस्याएं, पेट में गड़बड़ी, उबासी लेने में दबाव, मुंह का सूखना व कपकपी उठना आदि शामिल हैं।
ऐसे कारक जिनसे माइग्रेन सिरदर्द उत्पन्न होने के खतरे अधिक रहते हैं :- चाकलेट, शराब, चीज, नट्स का सेवन, दुर्गंध, हार्मोनल बदलाव, शोर-शराबा, तेज रोशनी, भावनात्मक तनाव, मौसम में बदलाव, सोने के तरीकों में बदलाव, व्यायाम, धूम्रपान, आहार को मिस करना, डा. छाबड़ा का यह भी कहना है कि माइग्रेन के भी कई प्रकार होते हैं।
विभिन्न प्रकार के माइग्रेन
साधारण माइग्रें : यह ऐसा सिरदर्द होता है जो कि बिना आहट के शुरू होता है, इस सिरदर्द के शुरू होने से पहले इसके कोई लक्षण नहीं उभरते हैं जैसाकि अन्य प्रकार के माइग्रेन में होता है।
क्लासिक माइग्रेन : इसमें सिरदर्द होने से पहले कई अन्य लक्षण उभरने लगते हैं जैसे धुंधली दृष्टि, ठीक से सुनाई न देना, देखते समय अजीब सी आकृतियों का दिखाई देना आदि। सिरदर्द शुरू होने से तकरीबन आधा घंटा पहले ये लक्षण उभर सकते हैं।
रीबाउंड सिरदर्द : जब भी पीड़ित के शरीर पर दवाइयों के डोज का असर न हो और सिरदर्द बरकरार रहे तो डोज बढ़ाकर ली जाती है। इससे कुछ समय तक तो उन दवाइयों का असर दिखता है, लेकिन आगे चलकर दवाइयों को बढ़ाया डोज का भी कोई प्रभाव नहीं होता है। तो, सिरदर्द बार-बार उभरने लगता है व माइग्रेन के लक्षण और भयानक होने लगते हैं। एक सप्ताह में यह दर्द दो से तीन बार तक हो सकता है।
ओक्युलर माइग्रेन : इस माइग्रेन के दौरान आंखों की रक्तवाहिनियां प्रभावित होती हैं न कि सिर की कोई रक्तवाहिनी। इससे पीड़ित को देखने में समस्या होती है। आंखों में अजीब सा प्रकाश दिखने लगता है। ये समस्या 15 से 20 मिनट तक रहती है फिर सब सामान्य हो जाता है, लेकिन बहुत से लोगों को इसके बाद हल्के सिरदर्द की शिकायत होती है।
आफथामोलजिक सिरदर्द : इसका संबंध भी आंखों की मध्य नसों से ही होता है। इसमें सिरदर्द भी होता है और पीड़ित को उल्टी भी होती है। जैसे-जैसे सिरदर्द बढ़ता है वैसे-वैसे आंखों की कुछ नसें पैरालिटिक हो जाती हैं। ऐसे में, आंखों की पलकें लटक जाती हैं। कई सप्ताहों तक वे ऐसे ही लटकी हुआ प्रतीत होती हैं।
सिरदर्द रहित माइग्रेन : इस प्रकार में पीड़ित को सिरदर्द तो नहीं होता बल्कि अन्य लक्षण थोड़ी देर के लिए परेशान कर सकते हैं। ये उन लोगों को होता है जिनका इतिहास माइग्रेन से ग्रस्त रहा हो।
बेसिलियर आर्टरी : इसमें मस्तिष्क की धमनी में दर्द की वजह से सिरदर्द उत्पन्न हो सकता है। इससे बोलने व देखने में तकलीफ हो सकती है। बड़ों से ज्यादा बच्चे इससे प्रभावित होते हैं।
कैरोटीडिनिया : इसमें चेहरे का आधा भाग प्रभावित होता है जैसे जॉलाइन व गर्दन का भाग। यह दर्द तीव्र व भयानक भी हो सकता है या फिर कम व हल्का भी हो सकता है। कैराटिड रक्तवाहिनी में सूजन भी हो सकती है। यह बुजुर्ग लोगों में अधिक पाया जाता है। इसका असर कई घंटों तक रह सकता है और ये सप्ताह में एक से ज्यादा बार तक हो सकता है। डा. सतनाम सिंह छाबड़ा के मुताबिक माइग्रेन के उचित उपचार के लिए कुछ परीक्षणों की आवश्यकता होती है जिसमें रक्त की जांच, ब्रेन स्कैनिंग (सीटी या एमआरआई तथा स्पाइनल टेप) शामिल हैं। माइग्रेन के मरीजों के लिए कुछ जरूरी याद रखने योग्य बातें : डा. छाबड़ा के अनुसार समय पर सोना व जगना चाहिए, नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए, बहुत ज्यादा देर तक भूखे रखना चाहिए, तनाव को नियमित व्यायाम के द्वारा नियंत्रित करना चाहिए, बहुत तेज व चुभने वाली रोशनी से बचना चाहिए, उन चीजों को पहचान कर उनसे बचना चाहिए जिनसे ये समस्या होने का संभावना हो। डा. छाबड़ा के मुताबिक आप के डाक्टर को माइग्रेन के इलाज प्रणाली से पूरी तरह परिचित होना चाहिए। दवाओं के बुरे प्रभावों को ध्यान में रखकर दवाएं दी जानी चाहिए। पहले दवाओं को कम मात्रा में शुरू करके धीरे-धीरे इसकी मात्रा को बढ़ाया जाना चाहिए। इससे दवाओं के बुरे प्रभाव को कम किया जा सकता है। हालांकि कोई भी सिरदर्द बेवजह उत्पन्न नहीं होता है और यह भी जरूरी नहीं कि हर बार उसका कारण ही हो, ऐसे में, केवल गर्दनाशक दवा का सेवन कर सिरदर्द के प्रहार को उस क्षण के लिए तो खत्म किया जा सकता है, लेकिन उससे होने वाले लम्बे समय के परिणामों को तो रोका नहीं जा सकता, जो कि शरीर की गतिविधियों पर गलत ही प्रभाव डालते हैं जैसे उच्च व निम्न रक्तचाप हृदय व फेफड़ों में परेशानी, मस्तिष्क विकार, नींद की कमी, नपुंसकता, पौष्टिक अल्सर, गैस विकास, गुर्दे व लीवर खराब होना इत्यादि। तो, अगली बार जब भी आप सिरदर्द को दूर करने के लिए किसी भी दर्दंनाशक दवा का सेवन करें तो उससे पहले इन दुष्प्रभावों के बारे में जरूर सोचें और डाक्टरी सलाह लेने में न हिचकें। माइग्रेन लिंगभेद का प्रमाण देते हुए औरतों पर अधिक प्रहार करता है, क्योंकि डाक्टरों के पास आने वाले माइग्रेन के मरीजों में औरतों की संख्या अधिक है। किन्तु दुर्भाग्यवश माइग्रेन से पीड़ित चार में से एक औरत ही इसका उपचार कराती है। अन्य औरतों को जब माइग्रेन अटैक पड़ता है तो वे दर्दनाक को अपना साथी समझ उसका सेवन करती रहती हैं और जानकारी के अभाव में अधिकतर औरतें इस दर्द के साथ केवल दर्दनाक दवाइयों का सेवन करते हुए जी रही हैं।

SHARE

neurotherapy

  • Image
  • Image
  • Image
  • Image
  • Image
    Blogger Comment
    Facebook Comment

2 comments:

  1. Prevent migraine attacks and say good bye t migraine. Migrokill capsule is a leading migraine herbal supplement to relieve migraine pain.

    ReplyDelete
  2. Anyone Suffering from depression, stress or anxiety? then contact with Dr Rajeev Gupta. A leading Psychiatrist in Ludhiana and hasserved many patients

    ReplyDelete