cervical disc

cervical disc
Normal Cervical Disc
In between each of the vertebrae (bones) in the spine is a disc, a tough fibrous shock-absorbing pad. Endplates line the ends of each vertebra and help hold individual discs in place. Each disc contains a tire-like outer band (called the annulus fibrosus) that encases a gel-like substance (called the nucleus pulposus). Nerve roots exit the spinal canal through small passageways between the vertebrae and discs. Pain and other symptoms can develop when the damaged disc pushes into the spinal canal or nerve roots.

neurotherapy घरेलू उपचार से अर्थराइटिस का इलाज

neurotherapy घरेलू उपचार से अर्थराइटिस का इलाज

अर्थराइटिस का दर्द इतना तीव्र होता है, कि व्याक्ति को चलने–फिरने और यहां तक कि घुटनों को मोड़ने में भी बहुत परेशानी होती है। घुटनों में दर्द होने के साथ–साथ दर्द के स्थान पर सूजन भी आ जाती है।

कभी–कभी दर्द के कारण बुखार भी हो जाता है और यहां तक कि जोड़ों का आकार भी टेढ़ा हो जाता है। कुछ लोग तो अस्पतालों के चक्कर काटकाट कर इतने थक जाते हैं कि वो इस बीमारी के साथ जीने को स्वीकार कर लेते हैं। 

ठंड के मौसम में गठिया के मरीज़ों को अधिक परेशानी होती है इसलिए उन्हें ठंड से बचने का हर संभव प्रयास करना चाहिए। इस बीमारी में चिकित्सक आहार पर विशेष ध्यान देने की सलाह देते हैं क्योंकि आप जो भी खाते हैं वो सीधा आपके स्वास्‍थ्‍य को प्रभावित करता है। अर्थराइटिस से बचाव के लिए आपके आहार में ग्लूयकोसामीन और कांड्रायटिन सल्फेवट होना चाहिए। ग्लूसकोसामीन और कांड्रायटिन सल्फेआट हड्डियों और कार्टिलेज के लिए अच्छें होते हैं। 

अर्थराइटिस में हमदर्द आहार:


•    अपने आहार में 25 प्रतिशत फल व सब्जि़यों को शामिल करें और ध्यान रखें कि आपको कब्ज़ ना हो। 
•    फलों में सन्तरे, मौसमी, केले, सेब, नाश्पाती, नारियल, तरबूज़ और खरबूज़ आपके लिए अच्छे हो सकते हैं।
•    सब्जि़यों में मूली, गाज़र, मेथी, खीरा, ककड़ी आपके आदि लें।
•    चोकरयुक्त आटे का प्रयोग करें क्योंकि इसमें फाइबर अधिक मात्रा में होता है । 

दर्द से राहत पहुंचाने वाले घरेलू नुस्खे:


•    दर्द के समय आप सन बाथ ले सकते हैं ।
•    5 से 10 ग्राम मेथी के दानों का चूर्ण बनाकर सुबह पानी के साथ लें।
•    4 से 5 लहसुन की कलियों को एक पाव दूध में डालकर उबालकर पीयें।
•    लहसुन के रस को कपूर में मिलाकर मालिश करने से भी दर्द से राहत मिलती है।
•    लाल तेल से मालिश करना भी आरामदायक होता है।
•    गर्म दूध में हल्दीर मिलाकर दिन में दो से तीन बार पीयें।
•    सोने से पहले दर्द से प्रभावित क्षेत्र पर गर्म सिरके से मालिश करें।
•    शरीर में पानी की मात्रा संतुलित रखें।  
•    जोड़ों के दर्द से बचने के लिए सबसे अच्छा। योगासन है गोमुखआसन।

अर्थराइटिस जैसी बीमारी लम्बे समय तक रहती है इसलिए मरीज़ को दवाओं से ज्यादा बचाव और सावधानियों पर ध्यान देना चाहिए। आज फीजि़योथेरेपी से लेकर नैचुरोपैथी तक में अर्थराइटिस के बहुत से समाधान निकाले गये हैं, लेकिन घरेलू नुस्खे और सावधानियां सबसे सुरक्षित उपचार हैं।

सही स्ट्रेटेजी है सफलता की गारंटी

सही स्ट्रेटेजी है सफलता की गारंटी

 स रकारी बैंकों में क्लर्क बनने के लिए कॉमन रिटेन एग्जामिनेशन के लिए समय काफी कम बचा है। परीक्षा में सफल होने के लिए प्रश्नों के पैटर्न को समझना बेहद जरूरी हो गया है, क्योंकि सभी बैंक अलग-अलग क्षेत्रों से संबंधित टेस्ट परीक्षा लेते हैं। अगर आपको इसमें सफल होना है, तो कम समय में सही प्रश्नों का अधिक से अधिक उत्तर देने की कोशिश करना होगा। इसके लिए अधिक से अधिक अभ्यास करना ही एकमात्र बेहतर विकल्प है। बेहतर स्ट्रेटेजी यह होगी कि आप खुद को आंकें कि आप कितने प्रश्नों को एक्यूरेसी के साथ आसानी से हल कर सकते हैं। आपके पास यह विकल्प होता है कि आप इनमें से किसी भी सेक्शन को पहले हल कर सकते हैं। आपके लिए बेहतर होगा कि आप सबसे पहले जनरल अवेयरनेस के प्रश्नों को हल करें। इसमें अपेक्षाकृत प्रश्न सीधे और कम टाइम टेकिंग होते हैं। यदि आपके पास 135 मिनट है, तो आप इसके लिए आप 20 मिनट का समय दे सकते हैं। अंग्रेजी के प्रश्नों को देखेंगे, तो उसमें 9-10 प्रश्न पैसेज से संबंधित होते हैं। आप सबसे पहले इन्हें हल करें। इसमें थोडी मेहनत से सभी प्रश्न सही हो सकते हैं। अंग्रेजी के लिए 25 मिनट से अधिक समय न दें। बचे हुए समय का उपयोग आप रीजनिंग और मैथ्स के लिए दें। इसमें समय अधिक लगता है और कुछ प्रश्नों के प्रॉसेस भी काफी लंबे होते हैं। आप सबसे पहले उन्हीं प्रश्नों को हल करें, जिसे अच्छी तरह से जानते हैं। शुरुआत में किसी प्रश्नों पर अधिक समय खर्च करने से बचने की कोशिश करें।
बेहतर प्रदर्शन है जरूरी
आप अपनी तैयारी को सामूहिक प्रैक्टिस के जरिये सरल बना सकते हैं। यदि आप दो-चार के ग्रुप में तैयारी कर रहे हैं, तो कम समय में कठिन और आसान प्रकार के खंडों की तैयारी की जा सकती है। सामूहिक अध्ययन से एक-दूसरे की खामियों का पता चलता है, जिससे परीक्षा हॉल में होने वाली गलतियों से बच सकते हैं। अक्सर स्टूडेंट के बीच इस तरह के झूठे प्रचार सुनने को मिलते हैं कि मिनिमम इतने क्वैश्चन सॉल्व करने के बाद ही परीक्षा में उत्तीर्ण हुआ जा सकता है। इस तरह के झूठे प्रचार में कभी भी न फंसें। इसके लिए सिर्फ मिनिमम क्वालिफिकेशन फिक्स होता है, जो आपको पहले से ही बता दिया जाता है। वास्तविकता यह है कि जितनी रिक्तियां होती हैं, उसी के अनुपात में सर्वाधिक अंक प्राप्त उम्मीदवारों को चुना जाता है। कितने अंक प्राप्त करने के बाद सफलता मिल सकती है, इस तरह की बातें पहले से कोई नहीं बता सकता। इस कारण यदि आपके मन में इस तरह के भ्रम हैं, तो सबसे पहले उसे दिमाग से निकाल दें तथा परीक्षा में सभी क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करें।
उत्तर वही दें, जो जानते हैं
अब प्राय: सभी बैंकों में गलत उत्तर देने पर निगेटिव मार्किग का प्रावधान है। इससे बचने के लिए पहले से ही इस बात को गांठ बांध लें कि जिन प्रश्नों के उत्तर आप नहीं जानते हैं या जिनके बारे में आपको दुविधा है, उन्हें कभी भी सॉल्व न करें। सिर्फ अनुमान के आधार पर बाकी प्रश्नों के उत्तर कतई न दें, अन्यथा यदि आप 100 में 50 प्रश्न सही करते हैं और 50 गलत, तो इन 50 के गलत उत्तरों के लिए आपके 50 सही उत्तरों के अंक भी कट जाएंगे। अब आप ही सोचिए कि क्या ऐसी स्थिति में आपकी मेहनत पर पानी नहीं फिरेगा? ऑब्जेक्टिव परीक्षा में अधिकतर स्टूडेंट्स रेड वॉयर सिंड्रोम के शिकार हो जाते हैं। इस संबंध में विशेषज्ञों का मानना है कि इस परीक्षा में सफलता उन्हीं को मिल सकती है, जो रेडवॉयर सिंड्रोम से ग्रस्त नहीं हैं। रेड वॉयर सिंड्रोम को इस तरह से समझा जा सकता है-पहला-आसान, दूसरा-50-50 और तीसरा लकी। दो विकल्प को अपनाना तो कारगर हो सकता है, लेकिन तीसरे विकल्प को अपनाना घातक होता है। रेड वॉयर सिंड्रोम से ग्रस्त स्टूडेंट्स तीसरे विकल्प का भरपूर इस्तेमाल करते हैं। इस तरह के स्टडेंट्स की यही सोच होती है कि सभी प्रश्नों को बनाकर ही सेलेक्शन पक्की की जा सकती है। कहने का आशय यह है कि अगर आप पहले से ही परीक्षा में प्रश्नों को सॉल्व करने की रणनीति बना लेते हैं, तो आप परीक्षा हॉल में अतिरिक्त परेशानी से बच सकते हैं।